शायरी–मेरी कलम से!–आज का शेर-

मोहबत में जब दिलो से रुह के फासले तय नहीं होते
तो दिल जब टूटते हैं तो कोई आवाज़ नहीं होती!

कुछ गुल ऐसें हैं जिनको  खिजां आ गयी महकने से पहले
बस तुम एक बार चूम लो इनको बिखरने से पहले!

                                                                               –      अश्विनी रमेश

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About ashwiniramesh

सूक्ष्म संवेदनाओं की सहज,सरल अभिव्यक्ति कविता है !कविता का स्रोत चेतना है ! जिस स्तर पर चेतना होगी उसी स्तर पर ही कविता होगी !सहज और सरल अभिव्यक्ति पाठक के लिए भी ग्रहणीय होगी जो कविता के किसी और कई पहलुओ से उसके साथ तारतम्य बिठाने का प्रयास करता है यानि स्वयं के जिए हुए को कविता में तलाशता है --अश्विनी रमेश !
यह प्रविष्टि आज का शेर में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

2 Responses to शायरी–मेरी कलम से!–आज का शेर-

  1. Arunjeet कहते हैं:

    kya khoob pt. ji, yeh sab Qamal hai apki spontaneity aur apke Qirdaar ka…

  2. ashwinik7 कहते हैं:

    Thank you. It is because of you that my tempo to shayari would remain intact,because, I know ,someone (you) is there to read and understand shayaree in the real sense of the term.–Ashwini Ramesh.

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