Monthly Archives: अगस्त 2011

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छिन जाने का भय, जो तुम्हारा सुख छीनता है

जन्म सेमृत्यु होने तकव्यक्ति भय के साये में जीता हैयह भय और कुछ नहीं बसकुछ छिन जाने का भय हैजो तुम्हारा सुख छीनता हैबच्चा पैदा होने के तुरंत बादजोर जोर से रोता हैउसकी दुनिया बदल गयी हैउसे भय लग रहा … पढना जारी रखे

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भ्रष्टाचार की परिभाषा

भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग लड़ने से पहलेस्पष्ट करना होगाभ्रष्टाचार का अर्थतय करनी होगी इसकी परिभाषाताकि भूखा, नंगा औरखुले आसमान के नीचेसोने वाला इन्सान कहींभ्रष्टाचार के अर्थ कीगिरफ्त में न आ जाएऔर यदि ऐसा हुआ तोप्रकृति-रुप सत्य पर भीलग जाएगा प्रश्नचिन्हक्योंकिभूखा, … पढना जारी रखे

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वह जो है | स्वार्थ

वह जो है वह जो हैतुम्हारा सच्चा और प्रियमित्रतुम्हारे मन के दरवाज़े कोरोज खटखटाता हैअर्धचेतन होकर अर्धनिद्रा मेंसोए हुए की तरहजब तुम अचानक जागते होऔर दरवाज़ा खोलते होतो बाहर तुम्हे लगता है कोई नहींफिर झट से तुमदरवाज़ा बंद कर देते होवह … पढना जारी रखे

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