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——–प्रकृति गीत——-

शाम ढल चुकी है अब होगा रात का अँधेरा कल जब हम मिलेंगे तब होगा नया सवेरा  ! मौसम ज्यों बदलतें हैं गर तुम भी यों ही बदलो तो होगा न मोह का डेरा फिर होगा न तेरा मेरा ! … पढना जारी रखे

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